| श्री महाभारत » पर्व 7: द्रोण पर्व » अध्याय 85: धृतराष्ट्रका विलाप » श्लोक 26 |
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| | | | श्लोक 7.85.26  | ततो दु:शासनस्यैव कर्णस्य च मतं द्वयो:।
अन्ववर्तत मां हित्वा कृष्ट: कालेन दुर्मति:॥ २६॥ | | | | | | अनुवाद | | तब दुष्टबुद्धि दुर्योधन ने काल के मोह में आकर मुझे छोड़ दिया और दु:शासन तथा कर्ण की सलाह मान ली। | | | | Then the evil-minded Duryodhana, tempted by time, left me and followed the advice of Dushasan and Karna. | | ✨ ai-generated | | |
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