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mahabharat 7.85.25: परन्तु उसने समस्त धनुर्धरों में श्रेष्ठ भगवान श्रीकृष्ण की बात मानने से इन्कार कर दिया। यद्यपि उन्होंने समझाने वाले वचन कहे थे, फिर भी दुर्योधन ने अन्यायपूर्वक उन्हें स्वीकार नहीं किया। 25॥   |   mahabharat अध्याय 7.85: धृतराष्ट्रका विलाप   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 85: धृतराष्ट्रका विलाप  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  7.85.25 
प्रत्याचष्ट स दाशार्हमृषभं सर्वधन्विनाम्।
अनुनेयानि जल्पन्तमनयान्नान्वपद्यत॥ २५॥
 
 
अनुवाद
परन्तु उसने समस्त धनुर्धरों में श्रेष्ठ भगवान श्रीकृष्ण की बात मानने से इन्कार कर दिया। यद्यपि उन्होंने समझाने वाले वचन कहे थे, फिर भी दुर्योधन ने अन्यायपूर्वक उन्हें स्वीकार नहीं किया। 25॥
 
But he refused to listen to Lord Krishna, the best among all archers. Although he spoke persuasive words, Duryodhana unjustly did not accept them. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)