श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 85: धृतराष्ट्रका विलाप  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  7.85.24 
शमं चेद् याचमानं त्वं प्रत्याख्यास्यसि केशवम्।
हितार्थमभिजल्पन्तं न तवास्ति रणे जय:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण तुम्हारे हित के लिए ही बोल रहे हैं और स्वयं संधि के लिए निवेदन कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में यदि तुम उनकी बात नहीं मानोगे, तो युद्ध में तुम्हारी विजय नहीं होगी।॥24॥
 
‘Lord Krishna is speaking only for your benefit and is himself requesting for a treaty. In such a situation, if you do not listen to him, then you will not be victorious in the war.'॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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