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श्लोक 7.85.23  |
वासुदेवेन तीर्थेन पुत्र संशाम्य पाण्डवै:।
कालप्राप्तमहं मन्ये मा त्वं दुर्योधनातिगा:॥ २३॥ |
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| अनुवाद |
| ‘पुत्र! भगवान श्रीकृष्ण को माध्यम बनाकर पाण्डवों से संधि कर लो। मैं इसे समयानुकूल कर्तव्य मानता हूँ। दुर्योधन! इसे टालो मत।॥ 23॥ |
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| ‘Son! Make peace with the Pandavas by using Lord Krishna as a medium. I consider this to be a timely duty. Duryodhan! Do not postpone this.॥ 23॥ |
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