Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.85.16-18h: वह महान ध्वनि जो संध्या के समय विन्द और अनुविन्द के शिविर में सुनाई देती थी, अब सुनाई नहीं देती। नर्तकों के समूहों के गीतों की वह महान ध्वनि जो सदा प्रसन्न रहने वाले केकयों के महलों में सुनाई देती थी, अब सुनाई नहीं देती। 16-17 1/2। | mahabharat अध्याय 7.85: धृतराष्ट्रका विलाप । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विन्दानुविन्दयो: सायं शिबिरे यो महाध्वनि:॥ १६॥
श्रूयते सोऽद्य न तथा केकयानां च वेश्मसु।
नित्यं प्रमुदितानां च तालगीतस्वनो महान्॥ १७॥
नृत्यतां श्रूयते तात गणानां सोऽद्य न स्वन:।
अनुवाद
वह महान ध्वनि जो संध्या के समय विन्द और अनुविन्द के शिविर में सुनाई देती थी, अब सुनाई नहीं देती। नर्तकों के समूहों के गीतों की वह महान ध्वनि जो सदा प्रसन्न रहने वाले केकयों के महलों में सुनाई देती थी, अब सुनाई नहीं देती। 16-17 1/2।
The great sound that used to be heard in the camp of Vind and Anuvind at dusk is no longer heard. The great sound of the songs of the hordes of dancers that used to be heard in the palaces of the ever-joyful Kekayas is no longer heard. 16-17 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥