श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 85: धृतराष्ट्रका विलाप  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.85.1 
धृतराष्ट्र उवाच
श्वोभूते किमकार्षुस्ते दु:खशोकसमन्विता:।
अभिमन्यौ हते तत्र के वायुध्यन्त मामका:॥ १॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले, "संजय! अभिमन्यु के मारे जाने पर शोक और शोक में डूबे हुए पाण्डवों ने प्रातःकाल होने पर क्या किया? और मेरे पक्ष के योद्धाओं में से किसने युद्ध किया?॥1॥
 
Dhritarashtra said, "Sanjay! What did the Pandavas, who were drowned in grief and sorrow after Abhimanyu was killed, do when the morning dawned? And who among the warriors on my side fought the battle?॥1॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd