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mahabharat 7.84.9: तत्पश्चात राजा युधिष्ठिर को प्रणाम करके सात्यकि, श्रीकृष्ण और अर्जुन बड़े हर्ष के साथ उनके शिविर से बाहर निकले॥9॥   |   mahabharat अध्याय 7.84: युधिष्ठिरका अर्जुनको आशीर्वाद, अर्जुनका स्वप्न सुनकर समस्त सुहृदोंकी प्रसन्नता, सात्यकि और श्रीकृष्णके साथ रथपर बैठकर अर्जुनकी रणयात्रा तथा अर्जुनके कहनेसे सात्यकिका युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरका अर्जुनको आशीर्वाद, अर्जुनका स्वप्न सुनकर समस्त सुहृदोंकी प्रसन्नता, सात्यकि और श्रीकृष्णके साथ रथपर बैठकर अर्जुनकी रणयात्रा तथा अर्जुनके कहनेसे सात्यकिका युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये जाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.84.9 
अभिवाद्य तु राजानं युयुधानाच्युतार्जुना:।
हृष्टा विनिर्ययुस्ते वै युधिष्ठिरनिवेशनात्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात राजा युधिष्ठिर को प्रणाम करके सात्यकि, श्रीकृष्ण और अर्जुन बड़े हर्ष के साथ उनके शिविर से बाहर निकले॥9॥
 
After that, after paying obeisance to King Yudhishthir, Satyaki, Shri Krishna and Arjun came out of his camp with great joy. 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)