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mahabharat 7.84.8: तत्पश्चात धर्मपुत्र युधिष्ठिर की आज्ञा पाकर कवचधारी समस्त हितैषी हर्ष में भरकर शीघ्रतापूर्वक युद्ध के लिए वहाँ से चले गए॥8॥   |   mahabharat अध्याय 7.84: युधिष्ठिरका अर्जुनको आशीर्वाद, अर्जुनका स्वप्न सुनकर समस्त सुहृदोंकी प्रसन्नता, सात्यकि और श्रीकृष्णके साथ रथपर बैठकर अर्जुनकी रणयात्रा तथा अर्जुनके कहनेसे सात्यकिका युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरका अर्जुनको आशीर्वाद, अर्जुनका स्वप्न सुनकर समस्त सुहृदोंकी प्रसन्नता, सात्यकि और श्रीकृष्णके साथ रथपर बैठकर अर्जुनकी रणयात्रा तथा अर्जुनके कहनेसे सात्यकिका युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये जाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.84.8 
अनुज्ञातास्तत: सर्वे सुहृदो धर्मसूनुना।
त्वरमाणा: सुसंनद्धा हृष्टा युद्धाय निर्ययु:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात धर्मपुत्र युधिष्ठिर की आज्ञा पाकर कवचधारी समस्त हितैषी हर्ष में भरकर शीघ्रतापूर्वक युद्ध के लिए वहाँ से चले गए॥8॥
 
Thereafter, taking orders from Dharma's son Yudhishthira, all the well-wishers wearing armor, filled with joy, quickly left from there for the war. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)