श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरका अर्जुनको आशीर्वाद, अर्जुनका स्वप्न सुनकर समस्त सुहृदोंकी प्रसन्नता, सात्यकि और श्रीकृष्णके साथ रथपर बैठकर अर्जुनकी रणयात्रा तथा अर्जुनके कहनेसे सात्यकिका युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये जाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  7.84.7 
तत: शिरोभिरवनिं स्पृष्ट्वा सर्वे च विस्मिता:।
नमस्कृत्य वृषाङ्काय साधु साध्वित्यथाब्रुवन्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
यह स्वप्न सुनकर वहां उपस्थित सभी लोग आश्चर्यचकित हो गए और भूमि पर सिर टेककर भगवान शिव को प्रणाम करते हुए बोले, 'यह बहुत अच्छा है, बहुत अच्छा है।'
 
On hearing this dream all the people present there were astonished, bowing their heads to the ground and paying respects to Lord Shiva, said, 'This is very good, very good.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)