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mahabharat 7.84.6: ऐसा कहकर अर्जुन ने अपने मित्रों को वह स्वप्न सुनाया जिसमें उन्होंने भगवान शिव से मिलने का स्वप्न देखा था।   |   mahabharat अध्याय 7.84: युधिष्ठिरका अर्जुनको आशीर्वाद, अर्जुनका स्वप्न सुनकर समस्त सुहृदोंकी प्रसन्नता, सात्यकि और श्रीकृष्णके साथ रथपर बैठकर अर्जुनकी रणयात्रा तथा अर्जुनके कहनेसे सात्यकिका युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरका अर्जुनको आशीर्वाद, अर्जुनका स्वप्न सुनकर समस्त सुहृदोंकी प्रसन्नता, सात्यकि और श्रीकृष्णके साथ रथपर बैठकर अर्जुनकी रणयात्रा तथा अर्जुनके कहनेसे सात्यकिका युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये जाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.84.6 
ततस्तत् कथयामास यथा दृष्टं धनंजय:।
आश्वासनार्थं सुहृदां त्र्यम्बकेण समागमम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर अर्जुन ने अपने मित्रों को वह स्वप्न सुनाया जिसमें उन्होंने भगवान शिव से मिलने का स्वप्न देखा था।
 
Having said this, Arjuna narrated to his friends, the dream in which he had dreamt about meeting Lord Shiva. 6.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)