श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरका अर्जुनको आशीर्वाद, अर्जुनका स्वप्न सुनकर समस्त सुहृदोंकी प्रसन्नता, सात्यकि और श्रीकृष्णके साथ रथपर बैठकर अर्जुनकी रणयात्रा तथा अर्जुनके कहनेसे सात्यकिका युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये जाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.84.5 
तमब्र्रवीत् ततो जिष्णुर्महदाश्चर्यमुत्तमम्।
दृष्टवानस्मि भद्रं ते केशवस्य प्रसादजम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
तब विजयी अर्जुन ने उनसे कहा - राजन! आपका कल्याण हो। आज मैंने एक बड़ा ही अद्भुत एवं अद्भुत स्वप्न देखा। वह स्वप्न भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से ही प्रकट हुआ। 5॥
 
Then the victorious Arjuna said to him - King! May you be well. Today I had a very wonderful and wonderful dream. That dream appeared only by the grace of Lord Shri Krishna. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)