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एवमुक्तस्तु पार्थेन सात्यकि: परवीरहा।
तथेत्युक्त्वागमत् तत्र यत्र राजा युधिष्ठिर:॥ ३५॥
अनुवाद
अर्जुन के ऐसा कहने पर शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले सात्यकि ने ‘बहुत अच्छा’ कहकर राजा युधिष्ठिर के पास चले गये।
Upon Arjuna saying this, Satyaki, the slayer of enemy warriors, said 'Very good' and went to where King Yudhishthira was.
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि प्रतिज्ञापर्वणि अर्जुनवाक्ये चतुरशीतितमोऽध्याय:॥ ८४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत प्रतिज्ञापर्वमें अर्जुनवाक्यविषयक चौरासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥