श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरका अर्जुनको आशीर्वाद, अर्जुनका स्वप्न सुनकर समस्त सुहृदोंकी प्रसन्नता, सात्यकि और श्रीकृष्णके साथ रथपर बैठकर अर्जुनकी रणयात्रा तथा अर्जुनके कहनेसे सात्यकिका युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये जाना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  7.84.35 
एवमुक्तस्तु पार्थेन सात्यकि: परवीरहा।
तथेत्युक्त्वागमत् तत्र यत्र राजा युधिष्ठिर:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन के ऐसा कहने पर शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले सात्यकि ने ‘बहुत अच्छा’ कहकर राजा युधिष्ठिर के पास चले गये।
 
Upon Arjuna saying this, Satyaki, the slayer of enemy warriors, said 'Very good' and went to where King Yudhishthira was.
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि प्रतिज्ञापर्वणि अर्जुनवाक्ये चतुरशीतितमोऽध्याय:॥ ८४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत प्रतिज्ञापर्वमें अर्जुनवाक्यविषयक चौरासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८४॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)