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mahabharat 7.84.33: सात्वतवीर! तुम्हें किसी भी प्रकार से मेरा पीछा नहीं करना चाहिए। तुम्हें राजा युधिष्ठिर की हर प्रकार से पूर्ण रक्षा करनी चाहिए। 33।   |   mahabharat अध्याय 7.84: युधिष्ठिरका अर्जुनको आशीर्वाद, अर्जुनका स्वप्न सुनकर समस्त सुहृदोंकी प्रसन्नता, सात्यकि और श्रीकृष्णके साथ रथपर बैठकर अर्जुनकी रणयात्रा तथा अर्जुनके कहनेसे सात्यकिका युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरका अर्जुनको आशीर्वाद, अर्जुनका स्वप्न सुनकर समस्त सुहृदोंकी प्रसन्नता, सात्यकि और श्रीकृष्णके साथ रथपर बैठकर अर्जुनकी रणयात्रा तथा अर्जुनके कहनेसे सात्यकिका युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये जाना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  7.84.33 
मय्यपेक्षा न कर्तव्या कथंचिदपि सात्वत।
राजन्येव परा गुप्ति: कार्या सर्वात्मना त्वया॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
सात्वतवीर! तुम्हें किसी भी प्रकार से मेरा पीछा नहीं करना चाहिए। तुम्हें राजा युधिष्ठिर की हर प्रकार से पूर्ण रक्षा करनी चाहिए। 33।
 
Saatvatveer! You should not follow me in any way. You should completely protect King Yudhishthira in every way. 33.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)