श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरका अर्जुनको आशीर्वाद, अर्जुनका स्वप्न सुनकर समस्त सुहृदोंकी प्रसन्नता, सात्यकि और श्रीकृष्णके साथ रथपर बैठकर अर्जुनकी रणयात्रा तथा अर्जुनके कहनेसे सात्यकिका युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये जाना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  7.84.32 
त्वयि चाहं पराश्वस्त: प्रद्युम्ने वा महारथे।
शक्नुयां सैन्धवं हन्तुमनपेक्षो नरर्षभ॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
पुरुषोत्तम! इस कार्य के लिए मुझे आप पर अथवा महाबली प्रद्युम्न पर पूर्ण विश्वास है। मैं बिना किसी की सहायता के ही सिंधुराज जयद्रथ का वध कर सकता हूँ।'
 
‘Best of men! For this task, I have complete faith in you or the mighty warrior Pradyumna. I can kill Sindhuraj Jayadratha without needing anyone's help.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)