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mahabharat 7.84.3: उसका सिर सूँघकर, उसे एक भुजा से गले लगाकर तथा उसे उत्तम आशीर्वाद देते हुए राजा ने मुस्कराते हुए कहा -॥3॥   |   mahabharat अध्याय 7.84: युधिष्ठिरका अर्जुनको आशीर्वाद, अर्जुनका स्वप्न सुनकर समस्त सुहृदोंकी प्रसन्नता, सात्यकि और श्रीकृष्णके साथ रथपर बैठकर अर्जुनकी रणयात्रा तथा अर्जुनके कहनेसे सात्यकिका युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरका अर्जुनको आशीर्वाद, अर्जुनका स्वप्न सुनकर समस्त सुहृदोंकी प्रसन्नता, सात्यकि और श्रीकृष्णके साथ रथपर बैठकर अर्जुनकी रणयात्रा तथा अर्जुनके कहनेसे सात्यकिका युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये जाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.84.3 
मूर्ध्नि चैनमुपाघ्राय परिष्वज्य च बाहुना।
आशिष: परमा: प्रोच्य स्मयमानोऽभ्यभाषत॥ ३॥
 
 
अनुवाद
उसका सिर सूँघकर, उसे एक भुजा से गले लगाकर तथा उसे उत्तम आशीर्वाद देते हुए राजा ने मुस्कराते हुए कहा -॥3॥
 
Smelling his head, embracing him with one arm and giving him his best blessings the king said with a smile -॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)