श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरका अर्जुनको आशीर्वाद, अर्जुनका स्वप्न सुनकर समस्त सुहृदोंकी प्रसन्नता, सात्यकि और श्रीकृष्णके साथ रथपर बैठकर अर्जुनकी रणयात्रा तथा अर्जुनके कहनेसे सात्यकिका युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये जाना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  7.84.29 
यथा परमकं कृत्यं सैन्धवस्य वधो मम।
तथैव सुमहत् कृत्यं धर्मराजस्य रक्षणम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
जैसे सिन्धुराज जयद्रथ का वध करना मेरे लिए अत्यन्त महान् कार्य है, उसी प्रकार धर्मराज की रक्षा करना भी अत्यन्त महान् कर्तव्य है॥ 29॥
 
Just as killing Jayadratha, the king of Sindhus, is a very great task for me, in the same way protecting Dharmaraja is also an extremely important duty.॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)