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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरका अर्जुनको आशीर्वाद, अर्जुनका स्वप्न सुनकर समस्त सुहृदोंकी प्रसन्नता, सात्यकि और श्रीकृष्णके साथ रथपर बैठकर अर्जुनकी रणयात्रा तथा अर्जुनके कहनेसे सात्यकिका युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये जाना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  7.84.25 
ततस्तस्मिन् क्षणे राजन् विविधानि शुभानि च।
प्रादुरासन् निमित्तानि विजयाय बहूनि च।
पाण्डवानां त्वदीयानां विपरीतानि मारिष॥ २५॥
 
 
अनुवाद
माननीय महाराज! उस समय अनेक शुभ शकुन प्रकट हुए, जो पाण्डवों की विजय और आपके सैनिकों की पराजय की सूचना दे रहे थे।
 
Honorable Maharaj! At that time many auspicious omens appeared, which were informing about the victory of the Pandavas and the defeat of your soldiers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)