श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरका अर्जुनको आशीर्वाद, अर्जुनका स्वप्न सुनकर समस्त सुहृदोंकी प्रसन्नता, सात्यकि और श्रीकृष्णके साथ रथपर बैठकर अर्जुनकी रणयात्रा तथा अर्जुनके कहनेसे सात्यकिका युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये जाना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  7.84.24 
तमनुप्रयतो वायु: पुण्यगन्धवह: शुभ:।
ववौ संहर्षयन् पार्थं द्विषतश्चापि शोषयन्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन के चले जाने पर पीछे से शुभ, शुद्ध और सुगन्धित वायु बहने लगी, जो अर्जुन के सुख को बढ़ाने वाली और उसके शत्रुओं का शोषण करने वाली थी॥24॥
 
After Arjuna's departure, auspicious, pure and fragrant wind started flowing from behind, which was increasing Arjuna's happiness and exploiting his enemies. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)