श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरका अर्जुनको आशीर्वाद, अर्जुनका स्वप्न सुनकर समस्त सुहृदोंकी प्रसन्नता, सात्यकि और श्रीकृष्णके साथ रथपर बैठकर अर्जुनकी रणयात्रा तथा अर्जुनके कहनेसे सात्यकिका युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये जाना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.84.22 
ततो वादित्रनिर्घोषैर्माङ्गल्यैश्च स्तवै: शुभै:।
प्रयान्तमर्जुनं वीरं मागधाश्चैव तुष्टुवु:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात यात्रीगण युद्ध-वाद्यों की ध्वनि तथा शुभ-मंगल स्तुतियों से यात्रा करते हुए वीर अर्जुन की स्तुति करने लगे॥22॥
 
Thereafter, the travelers started praising the brave Arjun while traveling with the sounds of war instruments and auspicious and auspicious praises. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)