Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.84.21: शत्रु समूह का नाश करने वाले अर्जुन जब सात्यकि और श्रीकृष्ण के साथ सिन्धुराज जयद्रथ को मारने की इच्छा से चल पड़े, उस समय वे वरुण और मित्र के साथ तारों से भरे युद्ध में जाते हुए इन्द्र के समान सुशोभित हो रहे थे ॥21॥ | mahabharat अध्याय 7.84: युधिष्ठिरका अर्जुनको आशीर्वाद, अर्जुनका स्वप्न सुनकर समस्त सुहृदोंकी प्रसन्नता, सात्यकि और श्रीकृष्णके साथ रथपर बैठकर अर्जुनकी रणयात्रा तथा अर्जुनके कहनेसे सात्यकिका युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये जाना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शत्रु समूह का नाश करने वाले अर्जुन जब सात्यकि और श्रीकृष्ण के साथ सिन्धुराज जयद्रथ को मारने की इच्छा से चल पड़े, उस समय वे वरुण और मित्र के साथ तारों से भरे युद्ध में जाते हुए इन्द्र के समान सुशोभित हो रहे थे ॥21॥
When Arjuna, the destroyer of the enemy group, set out with Satyaki and Shri Krishna with the desire to kill Sindhuraj Jayadratha, at that time he along with Varun and Mitra became adorned like Indra going into the starry battle. 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥