Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.84.19: घोड़ों को वश में करने की कला में श्रेष्ठ भगवान गोविन्द ने रथ की बागडोर अपने हाथ में ले ली, जैसे वृत्रासुर को मारने के लिए जाते समय मातलि ने इन्द्र के रथ की बागडोर अपने हाथ में ले ली थी॥ 19॥ | mahabharat अध्याय 7.84: युधिष्ठिरका अर्जुनको आशीर्वाद, अर्जुनका स्वप्न सुनकर समस्त सुहृदोंकी प्रसन्नता, सात्यकि और श्रीकृष्णके साथ रथपर बैठकर अर्जुनकी रणयात्रा तथा अर्जुनके कहनेसे सात्यकिका युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये जाना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
घोड़ों को वश में करने की कला में श्रेष्ठ भगवान गोविन्द ने रथ की बागडोर अपने हाथ में ले ली, जैसे वृत्रासुर को मारने के लिए जाते समय मातलि ने इन्द्र के रथ की बागडोर अपने हाथ में ले ली थी॥ 19॥
Lord Govinda, who was the best in the art of controlling the horses, took the reins of the chariot in his hands just as Matali had taken the reins of Indra's chariot when he was going to slay Vritrasura.॥ 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥