श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरका अर्जुनको आशीर्वाद, अर्जुनका स्वप्न सुनकर समस्त सुहृदोंकी प्रसन्नता, सात्यकि और श्रीकृष्णके साथ रथपर बैठकर अर्जुनकी रणयात्रा तथा अर्जुनके कहनेसे सात्यकिका युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये जाना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  7.84.18 
अन्वारुरुहतु: पार्थं युयुधानजनार्दनौ।
शर्यातेर्यज्ञमायान्तं यथेन्द्रं देवमश्विनौ॥ १८॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन के बैठ जाने पर सात्यकि और श्रीकृष्ण भी उस रथ पर चढ़ गए, मानो राजा शर्यात के यज्ञ में आते समय भगवान इन्द्र के साथ दोनों अश्विनीकुमार आ रहे हों॥18॥
 
After Arjuna sat down, Satyaki and Shri Krishna also mounted on that chariot, as if the two Ashwini Kumars were coming with Lord Indra while coming to the yagya of King Sharyata. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)