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mahabharat 7.84.15: उस समय तप, ज्ञान और आयु में वृद्ध, कर्मठ और संयमी ब्राह्मण उनकी स्तुति कर रहे थे और उन्हें विजयसूचक आशीर्वाद दे रहे थे। उनकी स्तुति सुनकर अर्जुन उस विशाल रथ पर आरूढ़ हुए।   |   mahabharat अध्याय 7.84: युधिष्ठिरका अर्जुनको आशीर्वाद, अर्जुनका स्वप्न सुनकर समस्त सुहृदोंकी प्रसन्नता, सात्यकि और श्रीकृष्णके साथ रथपर बैठकर अर्जुनकी रणयात्रा तथा अर्जुनके कहनेसे सात्यकिका युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरका अर्जुनको आशीर्वाद, अर्जुनका स्वप्न सुनकर समस्त सुहृदोंकी प्रसन्नता, सात्यकि और श्रीकृष्णके साथ रथपर बैठकर अर्जुनकी रणयात्रा तथा अर्जुनके कहनेसे सात्यकिका युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये जाना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.84.15 
तपोविद्यावयोवृद्धै: क्रियावद्भिर्जितेन्द्रियै:।
स्तूयमानो जयाशीर्भिरारुरोह महारथम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
उस समय तप, ज्ञान और आयु में वृद्ध, कर्मठ और संयमी ब्राह्मण उनकी स्तुति कर रहे थे और उन्हें विजयसूचक आशीर्वाद दे रहे थे। उनकी स्तुति सुनकर अर्जुन उस विशाल रथ पर आरूढ़ हुए।
 
At that time, the Brahmins, who were old in austerity, knowledge and age, active and self-controlled, were praising him and giving him blessings indicating victory. Listening to their praises, Arjun mounted that huge chariot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)