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mahabharat 7.84.13: तत्पश्चात् युद्ध के लिए सुसज्जित पुरुषों में श्रेष्ठ भगवान श्रीकृष्ण ने अपना नित्यकर्म पूरा करके बैठे हुए अर्जुन को बताया कि रथ तैयार है॥13॥   |   mahabharat अध्याय 7.84: युधिष्ठिरका अर्जुनको आशीर्वाद, अर्जुनका स्वप्न सुनकर समस्त सुहृदोंकी प्रसन्नता, सात्यकि और श्रीकृष्णके साथ रथपर बैठकर अर्जुनकी रणयात्रा तथा अर्जुनके कहनेसे सात्यकिका युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये जाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरका अर्जुनको आशीर्वाद, अर्जुनका स्वप्न सुनकर समस्त सुहृदोंकी प्रसन्नता, सात्यकि और श्रीकृष्णके साथ रथपर बैठकर अर्जुनकी रणयात्रा तथा अर्जुनके कहनेसे सात्यकिका युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये जाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.84.13 
तत: पुरुषशार्दूल: सज्जं सज्जपुर:सर:।
कृताह्निकाय पार्थाय न्यवेदयत तं रथम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् युद्ध के लिए सुसज्जित पुरुषों में श्रेष्ठ भगवान श्रीकृष्ण ने अपना नित्यकर्म पूरा करके बैठे हुए अर्जुन को बताया कि रथ तैयार है॥13॥
 
Thereafter, Lord Krishna, the best man among men equipped for war, after completing his daily routine, informed the sitting Arjuna that the chariot was ready. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)