श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरका अर्जुनको आशीर्वाद, अर्जुनका स्वप्न सुनकर समस्त सुहृदोंकी प्रसन्नता, सात्यकि और श्रीकृष्णके साथ रथपर बैठकर अर्जुनकी रणयात्रा तथा अर्जुनके कहनेसे सात्यकिका युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये जाना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.84.12 
स मेघसमनिर्घोषस्तप्तकाञ्चनसप्रभ:।
बभौ रथवर: क्लृप्त: शिशुर्दिवसकृद् यथा॥ १२॥
 
 
अनुवाद
वह महान् सुसज्जित रथ मेघों के समान घोर शब्द करता हुआ, तपाये हुए सोने के समान चमकता हुआ, प्रातःकाल के सूर्य के समान चमक रहा था॥12॥
 
That great decorated chariot, making a loud noise like the clouds and glowing like heated gold, was shining like the morning sun. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)