श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरका अर्जुनको आशीर्वाद, अर्जुनका स्वप्न सुनकर समस्त सुहृदोंकी प्रसन्नता, सात्यकि और श्रीकृष्णके साथ रथपर बैठकर अर्जुनकी रणयात्रा तथा अर्जुनके कहनेसे सात्यकिका युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये जाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.84.11 
तत्र गत्वा हृषीकेश: कल्पयामास सूतवत्।
रथं रथवरस्याजौ वानरर्षभलक्षणम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
वहाँ पहुँचकर भगवान श्रीकृष्ण ने सारथि की भाँति उस रथ को युद्ध के लिए सुसज्जित किया, जिस पर वानरों में श्रेष्ठ हनुमान् और रथियों में श्रेष्ठ अर्जुन का प्रतीक चिन्ह लगा हुआ था। 11॥
 
Reaching there, Lord Shri Krishna, like a charioteer, equipped the chariot with the flag bearing the symbol of Hanuman, the best of the monkeys, of Arjuna, the best among charioteers, for the war. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)