श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 84: युधिष्ठिरका अर्जुनको आशीर्वाद, अर्जुनका स्वप्न सुनकर समस्त सुहृदोंकी प्रसन्नता, सात्यकि और श्रीकृष्णके साथ रथपर बैठकर अर्जुनकी रणयात्रा तथा अर्जुनके कहनेसे सात्यकिका युधिष्ठिरकी रक्षाके लिये जाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.84.1 
संजय उवाच
तथा तु वदतां तेषां प्रादुरासीद् धनंजय:।
दिदृक्षुर्भरतश्रेष्ठं राजानं ससुहृद्‍गणम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं- राजन! जब उनमें आपस में बातचीत चल रही थी, तभी भरतवंशी श्रेष्ठ राजा युधिष्ठिर के दर्शन की इच्छा से अर्जुन अपने मित्रों के साथ वहाँ आये॥1॥
 
Sanjay says- Rajan! While the conversation was going on among them, Arjun came there along with his friends with the desire to see Yudhishthira, the best king of Bharat. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)