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mahabharat 7.83.22: वह शक्तिशाली, शस्त्रों का ज्ञाता, शूरवीर, पराक्रमी, युद्ध में कुशल, सदा निर्दयी और मनुष्यों में सबसे अधिक यशस्वी है ॥22॥   |   mahabharat अध्याय 7.83: अर्जुनकी प्रतिज्ञाको सफल बनानेके लिये युधिष्ठिरकी श्रीकृष्णसे प्रार्थना और श्रीकृष्णका उन्हें आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 83: अर्जुनकी प्रतिज्ञाको सफल बनानेके लिये युधिष्ठिरकी श्रीकृष्णसे प्रार्थना और श्रीकृष्णका उन्हें आश्वासन देना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.83.22 
वीर्यवानस्त्रसम्पन्न: पराक्रान्तो महाबल:।
युद्धशौण्ड: सदामर्षी तेजसा परमो नृणाम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
वह शक्तिशाली, शस्त्रों का ज्ञाता, शूरवीर, पराक्रमी, युद्ध में कुशल, सदा निर्दयी और मनुष्यों में सबसे अधिक यशस्वी है ॥22॥
 
He is powerful, knowledgeable in weapons, valiant, mighty, skilled in warfare, always merciless and the most illustrious among men. ॥22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)