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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 83: अर्जुनकी प्रतिज्ञाको सफल बनानेके लिये युधिष्ठिरकी श्रीकृष्णसे प्रार्थना और श्रीकृष्णका उन्हें आश्वासन देना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.83.21 
वासुदेव उवाच
सामरेष्वपि लोकेषु सर्वेषु न तथाविध:।
शरासनधर: कश्चिद् यथा पार्थो धनञ्जय:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण बोले - राजन! देवताओं सहित समस्त लोकों में आपके भाई कुन्तीपुत्र धनंजय के समान कोई भी पराक्रमी धनुर्धर नहीं है।
 
Shri Krishna said - King! In all the worlds including the gods, there is no one as strong an archer as your brother Kunti's son Dhananjay.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)