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mahabharat 7.83.20: जब धर्मराज युधिष्ठिर ने राजसभा में ऐसा कहा, तब उत्तम वक्ता भगवान श्रीकृष्ण ने मेघ के समान गम्भीर वाणी से उन्हें इस प्रकार उत्तर दिया॥20॥   |   mahabharat अध्याय 7.83: अर्जुनकी प्रतिज्ञाको सफल बनानेके लिये युधिष्ठिरकी श्रीकृष्णसे प्रार्थना और श्रीकृष्णका उन्हें आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 83: अर्जुनकी प्रतिज्ञाको सफल बनानेके लिये युधिष्ठिरकी श्रीकृष्णसे प्रार्थना और श्रीकृष्णका उन्हें आश्वासन देना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  7.83.20 
इत्युक्त: पुण्डरीकाक्षो धर्मराजेन संसदि।
तोयमेघस्वनो वाग्मी प्रत्युवाच युधिष्ठिरम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
जब धर्मराज युधिष्ठिर ने राजसभा में ऐसा कहा, तब उत्तम वक्ता भगवान श्रीकृष्ण ने मेघ के समान गम्भीर वाणी से उन्हें इस प्रकार उत्तर दिया॥20॥
 
When Dharamraj Yudhishthira said this in the royal court, Lord Krishna, the excellent orator, in a solemn voice like a rain cloud, replied to him as follows. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)