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mahabharat 7.83.2: मधुसूदन! क्या तुमने सुखपूर्वक रात्रि बिताई? अच्युत! क्या तुम्हारी सभी इन्द्रियाँ प्रसन्न हैं?॥2॥   |   mahabharat अध्याय 7.83: अर्जुनकी प्रतिज्ञाको सफल बनानेके लिये युधिष्ठिरकी श्रीकृष्णसे प्रार्थना और श्रीकृष्णका उन्हें आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 83: अर्जुनकी प्रतिज्ञाको सफल बनानेके लिये युधिष्ठिरकी श्रीकृष्णसे प्रार्थना और श्रीकृष्णका उन्हें आश्वासन देना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.83.2 
सुखेन रजनी व्युष्टा कच्चित् ते मधुसूदन।
कच्चिज्ज्ञानानि सर्वाणि प्रसन्नानि तवाच्युत॥ २॥
 
 
अनुवाद
मधुसूदन! क्या तुमने सुखपूर्वक रात्रि बिताई? अच्युत! क्या तुम्हारी सभी इन्द्रियाँ प्रसन्न हैं?॥2॥
 
‘Madhusudana! Did you spend a pleasant night? Achyuta! Are all your senses happy?’॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)