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mahabharat 7.83.18: शत्रु का नाश करने वाले! सनातन देवदेवेश्वर! विष्णो! जिश्नो! खरगोश! कृष्ण! वैकुण्ठ! पुरूषोत्तम! आप को बधाई। 18॥   |   mahabharat अध्याय 7.83: अर्जुनकी प्रतिज्ञाको सफल बनानेके लिये युधिष्ठिरकी श्रीकृष्णसे प्रार्थना और श्रीकृष्णका उन्हें आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 83: अर्जुनकी प्रतिज्ञाको सफल बनानेके लिये युधिष्ठिरकी श्रीकृष्णसे प्रार्थना और श्रीकृष्णका उन्हें आश्वासन देना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  7.83.18 
नमस्ते देवदेवेश सनातन विशातन।
विष्णो जिष्णो हरे कृष्ण वैकुण्ठ पुरुषोत्तम॥ १८॥
 
 
अनुवाद
शत्रु का नाश करने वाले! सनातन देवदेवेश्वर! विष्णो! जिश्नो! खरगोश! कृष्ण! वैकुण्ठ! पुरूषोत्तम! आप को बधाई। 18॥
 
Destroyer of the enemy! Sanatan Devdeveshwar! Vishno! Jishno! Hare! Krishna! Vaikuntha! Purushottam! Greetings to you. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)