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mahabharat 7.83.10: हे प्रभु! जैसे देवतागण इन्द्र की शरण लेते हैं, वैसे ही हम भी आपकी ही शरण में जाकर युद्ध में विजय और शाश्वत सुख प्राप्त करना चाहते हैं॥10॥   |   mahabharat अध्याय 7.83: अर्जुनकी प्रतिज्ञाको सफल बनानेके लिये युधिष्ठिरकी श्रीकृष्णसे प्रार्थना और श्रीकृष्णका उन्हें आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 83: अर्जुनकी प्रतिज्ञाको सफल बनानेके लिये युधिष्ठिरकी श्रीकृष्णसे प्रार्थना और श्रीकृष्णका उन्हें आश्वासन देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.83.10 
एकं त्वां वयमाश्रित्य सहस्राक्षमिवामरा:।
प्रार्थयामो जयं युद्धे शाश्वतानि सुखानि च॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! जैसे देवतागण इन्द्र की शरण लेते हैं, वैसे ही हम भी आपकी ही शरण में जाकर युद्ध में विजय और शाश्वत सुख प्राप्त करना चाहते हैं॥10॥
 
Lord! Just as the gods take refuge in Indra, similarly we want to seek refuge in you alone and achieve victory in the war and eternal happiness.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)