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mahabharat 7.82.8: वहाँ स्नान करने के बाद श्वेत वस्त्र पहने एक सौ आठ युवक स्नान के लिए स्वर्ण घड़ों में जल भरने आगे आये।   |   mahabharat अध्याय 7.82: युधिष्ठिरका प्रात:काल उठकर स्नान और नित्यकर्म आदिसे निवृत्त हो ब्राह्मणोंको दान देना, वस्त्राभूषणोंसे विभूषित हो सिंहासनपर बैठना और वहाँ पधारे हुए भगवान् श्रीकृष्णका पूजन करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 82: युधिष्ठिरका प्रात:काल उठकर स्नान और नित्यकर्म आदिसे निवृत्त हो ब्राह्मणोंको दान देना, वस्त्राभूषणोंसे विभूषित हो सिंहासनपर बैठना और वहाँ पधारे हुए भगवान् श्रीकृष्णका पूजन करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.82.8 
तत: शुक्लाम्बरा: स्नातास्तरुणा: शतमष्ट च।
स्नापका: काञ्चनै: कुम्भै: पूर्णै: समुपतस्थिरे॥ ८॥
 
 
अनुवाद
वहाँ स्नान करने के बाद श्वेत वस्त्र पहने एक सौ आठ युवक स्नान के लिए स्वर्ण घड़ों में जल भरने आगे आये।
 
After bathing there, one hundred and eight young men wearing white clothes came forward to fill water in golden pitchers to bathe them. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)