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mahabharat 7.82.6: मेघ के समान गम्भीर और भव्य वाद्यों की ध्वनि आकाश में फैल गई। उस ध्वनि से सोए हुए राजा युधिष्ठिर जाग उठे ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 7.82: युधिष्ठिरका प्रात:काल उठकर स्नान और नित्यकर्म आदिसे निवृत्त हो ब्राह्मणोंको दान देना, वस्त्राभूषणोंसे विभूषित हो सिंहासनपर बैठना और वहाँ पधारे हुए भगवान् श्रीकृष्णका पूजन करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 82: युधिष्ठिरका प्रात:काल उठकर स्नान और नित्यकर्म आदिसे निवृत्त हो ब्राह्मणोंको दान देना, वस्त्राभूषणोंसे विभूषित हो सिंहासनपर बैठना और वहाँ पधारे हुए भगवान् श्रीकृष्णका पूजन करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.82.6 
समेघसमनिर्घोषो महान् शब्दोऽस्पृशद् दिवम्।
पार्थिवप्रवरं सुप्तं युधिष्ठिरमबोधयत्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
मेघ के समान गम्भीर और भव्य वाद्यों की ध्वनि आकाश में फैल गई। उस ध्वनि से सोए हुए राजा युधिष्ठिर जाग उठे ॥6॥
 
The sound of the musical instruments, as solemn and grand as a cloud, spread to the sky. That sound woke up the sleeping king Yudhishthira. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)