vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 82: युधिष्ठिरका प्रात:काल उठकर स्नान और नित्यकर्म आदिसे निवृत्त हो ब्राह्मणोंको दान देना, वस्त्राभूषणोंसे विभूषित हो सिंहासनपर बैठना और वहाँ पधारे हुए भगवान् श्रीकृष्णका पूजन करना
»
श्लोक 33-34h
श्लोक
7.82.33-34h
सोऽब्रवीत् पुरुषव्याघ्र: स्वागतेनैव माधवम्॥ ३३॥
अर्घ्यं चैवासनं चास्मै दीयतां परमार्चितम्।
अनुवाद
तब नरसिंह युधिष्ठिर ने द्वारपाल से कहा, 'माधव को बाहें फैलाकर लाओ और उन्हें हवि और उत्तम आसन दो।'
Then Yudhishthira, the lion of men, said to the gatekeeper, 'Bring Madhava with open arms and offer him oblations and the best seat.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×