श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 82: युधिष्ठिरका प्रात:काल उठकर स्नान और नित्यकर्म आदिसे निवृत्त हो ब्राह्मणोंको दान देना, वस्त्राभूषणोंसे विभूषित हो सिंहासनपर बैठना और वहाँ पधारे हुए भगवान् श्रीकृष्णका पूजन करना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  7.82.30 
ह्रादेन गजघण्टानां शङ्खानां निनदेन च।
नराणां पदशब्दैश्च कम्पतीव स्म मेदिनी॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
हाथियों की घंटियों की ध्वनि, शंखों की ध्वनि और पैदल चलने वाले लोगों के पदचापों के शोर से पृथ्वी कांपने लगती थी।
 
The sound of the elephants' bells, the sound of the conches and the noise of the footsteps of the people walking on foot made the earth seem to tremble. 30.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)