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mahabharat 7.82.28: उस समय रथी उनकी स्तुति कर रहे थे, बंदीगण प्रार्थना कर रहे थे और गन्धर्वगण उनकी कीर्ति के गान कर रहे थे। इन सबसे घिरे हुए युधिष्ठिर वहाँ सिंहासन पर बैठे थे॥ 28॥   |   mahabharat अध्याय 7.82: युधिष्ठिरका प्रात:काल उठकर स्नान और नित्यकर्म आदिसे निवृत्त हो ब्राह्मणोंको दान देना, वस्त्राभूषणोंसे विभूषित हो सिंहासनपर बैठना और वहाँ पधारे हुए भगवान् श्रीकृष्णका पूजन करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 82: युधिष्ठिरका प्रात:काल उठकर स्नान और नित्यकर्म आदिसे निवृत्त हो ब्राह्मणोंको दान देना, वस्त्राभूषणोंसे विभूषित हो सिंहासनपर बैठना और वहाँ पधारे हुए भगवान् श्रीकृष्णका पूजन करना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  7.82.28 
संस्तूयमान: सूतैश्च वन्द्यमानश्च वन्दिभि:।
उपगीयमानो गन्धर्वैरास्ते स्म कुरुनन्दन:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
उस समय रथी उनकी स्तुति कर रहे थे, बंदीगण प्रार्थना कर रहे थे और गन्धर्वगण उनकी कीर्ति के गान कर रहे थे। इन सबसे घिरे हुए युधिष्ठिर वहाँ सिंहासन पर बैठे थे॥ 28॥
 
At that time the charioteers were praising him, the prisoners were praying and the Gandharvas were singing songs of his fame. Surrounded by all these, Yudhishthira was sitting on the throne there.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)