Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.82.27: चन्द्रमा की किरणों के समान श्वेत और सुवर्णमय दण्डों से युक्त अनेक सुन्दर और मनोहर पंखे लहरा रहे थे। वे राजा युधिष्ठिर को उसी प्रकार सुशोभित कर रहे थे, जैसे बिजली बादलों को सुशोभित करती है॥ 27॥ | mahabharat अध्याय 7.82: युधिष्ठिरका प्रात:काल उठकर स्नान और नित्यकर्म आदिसे निवृत्त हो ब्राह्मणोंको दान देना, वस्त्राभूषणोंसे विभूषित हो सिंहासनपर बैठना और वहाँ पधारे हुए भगवान् श्रीकृष्णका पूजन करना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
चन्द्रमा की किरणों के समान श्वेत और सुवर्णमय दण्डों से युक्त अनेक सुन्दर और मनोहर पंखे लहरा रहे थे। वे राजा युधिष्ठिर को उसी प्रकार सुशोभित कर रहे थे, जैसे बिजली बादलों को सुशोभित करती है॥ 27॥
Many beautiful and graceful fans, white as the rays of the moon and with golden staffs, were being waved. They were beautifying King Yudhishthira in the same way as lightning beautifies clouds.॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥