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mahabharat 7.82.25: वहाँ बैठे हुए महाराज युधिष्ठिर को उनके सेवकों ने सभी प्रकार के चमकते हुए और बहुमूल्य आभूषण भेंट किये।   |   mahabharat अध्याय 7.82: युधिष्ठिरका प्रात:काल उठकर स्नान और नित्यकर्म आदिसे निवृत्त हो ब्राह्मणोंको दान देना, वस्त्राभूषणोंसे विभूषित हो सिंहासनपर बैठना और वहाँ पधारे हुए भगवान् श्रीकृष्णका पूजन करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 82: युधिष्ठिरका प्रात:काल उठकर स्नान और नित्यकर्म आदिसे निवृत्त हो ब्राह्मणोंको दान देना, वस्त्राभूषणोंसे विभूषित हो सिंहासनपर बैठना और वहाँ पधारे हुए भगवान् श्रीकृष्णका पूजन करना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  7.82.25 
तत्र तस्योपविष्टस्य भूषणानि महात्मन:।
उपाजह्रुर्महार्हाणि प्रेष्या: शुभ्राणि सर्वश:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
वहाँ बैठे हुए महाराज युधिष्ठिर को उनके सेवकों ने सभी प्रकार के चमकते हुए और बहुमूल्य आभूषण भेंट किये।
 
Sitting there, the great King Yudhishthira was presented by his servants with all kinds of sparkling and precious ornaments. 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)