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mahabharat 7.82.11: तत्पश्चात् उसने हंस के समान एक ढीली सफेद पगड़ी ली और उसे अपने सिर पर लपेटकर माथे का जल सुखा लिया ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 7.82: युधिष्ठिरका प्रात:काल उठकर स्नान और नित्यकर्म आदिसे निवृत्त हो ब्राह्मणोंको दान देना, वस्त्राभूषणोंसे विभूषित हो सिंहासनपर बैठना और वहाँ पधारे हुए भगवान् श्रीकृष्णका पूजन करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 82: युधिष्ठिरका प्रात:काल उठकर स्नान और नित्यकर्म आदिसे निवृत्त हो ब्राह्मणोंको दान देना, वस्त्राभूषणोंसे विभूषित हो सिंहासनपर बैठना और वहाँ पधारे हुए भगवान् श्रीकृष्णका पूजन करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.82.11 
राजहंसनिभं प्राप्य उष्णीषं शिथिलार्पितम्।
जलक्षयनिमित्तं वै वेष्टयामास मूर्धनि॥ ११॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उसने हंस के समान एक ढीली सफेद पगड़ी ली और उसे अपने सिर पर लपेटकर माथे का जल सुखा लिया ॥11॥
 
Thereafter he took a loose white turban like that of a swan and wrapped it around his head to dry the water from his forehead. ॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)