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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 81: अर्जुनको स्वप्नमें ही पुन: पाशुपतास्त्रकी प्राप्ति  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.81.3 
ततोऽभिपूज्य मनसा कृष्णं शर्वं च पाण्डव:।
इच्छाम्यहं दिव्यमस्त्रमित्यभाषत शङ्करम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
तब पाण्डुपुत्र अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण और भगवान शिव की मानसिक आराधना की और भगवान शंकर से कहा - 'प्रभो! मैं आपसे एक दिव्यास्त्र प्राप्त करना चाहता हूँ।'
 
Then Arjuna, son of Pandu, mentally worshipped Lord Krishna and Lord Shiva and said to Lord Shankar - 'Lord! I wish to obtain a divine weapon from you.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)