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ततोऽभिपूज्य मनसा कृष्णं शर्वं च पाण्डव:।
इच्छाम्यहं दिव्यमस्त्रमित्यभाषत शङ्करम्॥ ३॥
अनुवाद
तब पाण्डुपुत्र अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण और भगवान शिव की मानसिक आराधना की और भगवान शंकर से कहा - 'प्रभो! मैं आपसे एक दिव्यास्त्र प्राप्त करना चाहता हूँ।'
Then Arjuna, son of Pandu, mentally worshipped Lord Krishna and Lord Shiva and said to Lord Shankar - 'Lord! I wish to obtain a divine weapon from you.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥