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mahabharat 7.81.22-23h: भगवान शंकर से उस दिव्य पाशुपतास्त्र को पुनः प्राप्त करके वीर योद्धा अर्जुन के शरीर में रोमांच उत्पन्न हुआ और उन्हें विश्वास हो गया कि अब उनका कार्य पूर्ण हो जाएगा। 22 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.81: अर्जुनको स्वप्नमें ही पुन: पाशुपतास्त्रकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 81: अर्जुनको स्वप्नमें ही पुन: पाशुपतास्त्रकी प्राप्ति  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  7.81.22-23h 
तत: पाशुपतं दिव्यमवाप्य पुनरीश्वरात्॥ २२॥
संहृष्टरोमा दुर्धर्ष: कृतं कार्यममन्यत।
 
 
अनुवाद
भगवान शंकर से उस दिव्य पाशुपतास्त्र को पुनः प्राप्त करके वीर योद्धा अर्जुन के शरीर में रोमांच उत्पन्न हुआ और उन्हें विश्वास हो गया कि अब उनका कार्य पूर्ण हो जाएगा। 22 1/2॥
 
After retrieving that divine Pashupatastra from Lord Shankar, the brave warrior Arjuna felt a thrill in his body and he believed that now his work would be completed. 22 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)