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mahabharat 7.81.21-22h: उसका अभिप्राय जानकर भगवान शंकर प्रसन्न हुए और उसे वरदानस्वरूप घातक पाशुपत अस्त्र प्रदान किया, जो उसकी प्रतिज्ञा पूरी करने वाला था। 21 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.81: अर्जुनको स्वप्नमें ही पुन: पाशुपतास्त्रकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 81: अर्जुनको स्वप्नमें ही पुन: पाशुपतास्त्रकी प्राप्ति  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  7.81.21-22h 
तस्य तन्मतमाज्ञाय प्रीत: प्रादाद् वरं भव:॥ २१॥
तच्च पाशुपतं घोरं प्रतिज्ञायाश्च पारणम्।
 
 
अनुवाद
उसका अभिप्राय जानकर भगवान शंकर प्रसन्न हुए और उसे वरदानस्वरूप घातक पाशुपत अस्त्र प्रदान किया, जो उसकी प्रतिज्ञा पूरी करने वाला था। 21 1/2॥
 
Knowing his intentions, Lord Shankar was pleased and gave him as a boon the deadly Pashupat weapon, which was supposed to fulfill his promise. 21 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)