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mahabharat 7.81.17: मन को एकाग्र करके उन्होंने उस उत्तम धनुष को हाथ में लिया और धनुर्धर की भाँति खड़े हो गए। फिर उन्होंने बाण सहित उस उत्तम धनुष को विधिपूर्वक खींचा।   |   mahabharat अध्याय 7.81: अर्जुनको स्वप्नमें ही पुन: पाशुपतास्त्रकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 81: अर्जुनको स्वप्नमें ही पुन: पाशुपतास्त्रकी प्राप्ति  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.81.17 
स तद् गृह्य धनु:श्रेष्ठं तस्थौ स्थानं समाहित:।
विचकर्षाथ विधिवत् सशरं धनुरुत्तमम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
मन को एकाग्र करके उन्होंने उस उत्तम धनुष को हाथ में लिया और धनुर्धर की भाँति खड़े हो गए। फिर उन्होंने बाण सहित उस उत्तम धनुष को विधिपूर्वक खींचा।
 
With his mind focused, he took that excellent bow in his hand and stood like an archer should. Then he pulled that excellent bow along with the arrow as per the prescribed method.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)