श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 81: अर्जुनको स्वप्नमें ही पुन: पाशुपतास्त्रकी प्राप्ति  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.81.10 
ततस्तौ तत् सरो गत्वा सूर्यमण्डलसंनिभम्।
नागमन्तर्जले घोरं ददृशातेऽर्जुनाच्युतौ॥ १०॥
 
 
अनुवाद
सरोवर के तट पर पहुँचकर अर्जुन और श्रीकृष्ण ने जल के अन्दर एक भयंकर सर्प देखा, जो सूर्य के समान चमक रहा था॥10॥
 
Upon reaching the bank of the lake, Arjuna and Sri Krishna saw a fierce serpent inside the water, which was shining like the sun.॥ 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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