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mahabharat 7.80.9: शोक करने वाला मनुष्य अपने शत्रुओं को प्रसन्न करता है और अपने स्वजनों को शोक से दुर्बल कर देता है। इसके अतिरिक्त वह स्वयं भी शोक से दुर्बल हो जाता है। इसलिए तुम्हें शोक नहीं करना चाहिए। 9॥   |   mahabharat अध्याय 7.80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.80.9 
शोचन् नन्दयते शत्रून् कर्शयत्यपि बान्धवान्।
क्षीयते च नरस्तस्मान्न त्वं शोचितुमर्हसि॥ ९॥
 
 
अनुवाद
शोक करने वाला मनुष्य अपने शत्रुओं को प्रसन्न करता है और अपने स्वजनों को शोक से दुर्बल कर देता है। इसके अतिरिक्त वह स्वयं भी शोक से दुर्बल हो जाता है। इसलिए तुम्हें शोक नहीं करना चाहिए। 9॥
 
A man who mourns makes his enemies happy and his relatives become weak with grief. Apart from this, he himself also becomes weak due to grief. Therefore you should not mourn. 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)