Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.80.8: हे धनंजय! जो भी कार्य तुम्हें करना हो, उसे प्रयत्नपूर्वक करो। हे धनंजय! उद्योगहीन मनुष्य का दुःख उसके लिए शत्रु के समान है।   |   mahabharat अध्याय 7.80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.80.8 
यत् तु कार्यं भवेत् कार्यं कर्मणा तत् समाचर।
हीनचेष्टस्य य: शोक: स हि शत्रुर्धनंजय॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे धनंजय! जो भी कार्य तुम्हें करना हो, उसे प्रयत्नपूर्वक करो। हे धनंजय! उद्योगहीन मनुष्य का दुःख उसके लिए शत्रु के समान है।
 
Whatever work you have to do, do it with effort. O Dhananjaya! The sorrow of a man without industry is like an enemy to him. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)