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mahabharat 7.80.64: हे भक्तों पर प्रेम करने वाले, स्वर्ण के समान वर्ण वाले तथा स्वर्ण कवच धारण करने वाले भगवान, मैं आपको सदैव नमस्कार करता हूँ। हे प्रभु! हमारा मनोवांछित वरदान पूर्ण हो।   |   mahabharat अध्याय 7.80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  7.80.64 
नमो हिरण्यवर्णाय हिरण्यकवचाय च।
भक्तानुकम्पिने नित्यं सिध्यतां नो वर: प्रभो॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
हे भक्तों पर प्रेम करने वाले, स्वर्ण के समान वर्ण वाले तथा स्वर्ण कवच धारण करने वाले भगवान, मैं आपको सदैव नमस्कार करता हूँ। हे प्रभु! हमारा मनोवांछित वरदान पूर्ण हो।
 
I always salute you, the God who loves his devotees and whose complexion is like gold and who wears a golden armour. O Lord! May our desired boon be fulfilled.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)