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mahabharat 7.80.62: हे सर्वव्यापी कल्याणकारी भगवान शिव को नमस्कार है, जिनका मुख ब्राह्मणों का मुख है। हे वाणी के स्वामी और प्रजा के रक्षक, आपको नमस्कार है। 62.   |   mahabharat अध्याय 7.80: अर्जुनका स्वप्नमें भगवान् श्रीकृष्णके साथ शिवजीके समीप जाना और उनकी स्तुति करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.80.62 
ब्रह्मवक्त्राय सर्वाय शङ्कराय शिवाय च।
नमोऽस्तु वाचस्पतये प्रजानां पतये नम:॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
हे सर्वव्यापी कल्याणकारी भगवान शिव को नमस्कार है, जिनका मुख ब्राह्मणों का मुख है। हे वाणी के स्वामी और प्रजा के रक्षक, आपको नमस्कार है। 62.
 
Salutations to Lord Shiva, the omnipresent benefactor, whose mouth is the Brahmins. Salutations to you, the lord of speech and the protector of the subjects. 62.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)